https://goodworld.in A website by Madhav Bhope

Memories of SBH on foundation day माँ का आँचल

sbh

Memories of SBH on foundation day माँ का आँचल

 

आज जब कि सब लोग मश्गुल है जश्न मनाने में

कुछ लोग है खोए खोए से अपने मन में ॥१॥

जिन्हे यकीन था कि माँ का आँचल कभी दूर नही होगा उनसे

आज अचानक लग रहे है मेले में माँ से बिछडे हुए बच्चे से ॥२॥

याद आ रहे है वो बचपन के दिन सुहानेसे

जब माँ कि गोदी में खेलते थे खतरोंसे अनजानसे ॥३॥

एक सुहानीसी दुनिया थी हमारी भाईचारेकी

जहाँ खुशी और दर्द बांटा जाता था आपसमें प्यारसे ॥४॥

एक साथ पले, बढे, खेले, कूदे इस माँ कि आँचल कि छायामें

आज उस माँ का आँचल ही बिछड गया इस मेले में ॥५॥

बेशक़ हमें मिल रही है एक पह्चान नई

हमारी माँ से भी खूबसूरत एक माँ नई ॥६॥

लेकिन अनजानेसे चेहरोमे कहाँ खो जाएंगे हम

अपने अस्तित्व को न जाने कहाँ ढूंढेगे हम ॥७॥

उस चकाचौंध की दुनिया में ऐ माँ

तेरी यादो के सहारे जी लेंगे हम!! ॥८॥

 

माधव भोपे in April 2017

Hanuman Chalisa Quiz

hanuman-2

जब आप क्विज़ शुरू करेंगे, तो पहली स्क्रीन जो आप देखेंगे उसे हनुमान चालीसा क्विज़- परिचय कहा जाता है। पहले दोहे के शब्द हल्के अक्षरों में दिखाई देंगे।  यादृच्छिक, वे  बिना किसी क्रम के आएंगे। उदाहरण के लिए-

श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि ।

बरनऊ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि ।।

ये सभी शब्द ऊपर दिए गए हैं। आपको शब्दों को अपनी उंगली से सही क्रम में खींचकर सही स्थानों पर रखना होगा। यदि शब्द का स्थान सही है तो वह वहां फिट होगा, अन्यथा नहीं। यदि उपरोक्त श्लोक के सभी शब्द सही स्थान पर हैं, तो आपको बधाई संदेश प्राप्त होगा, पूरा श्लोक पुनः लिखा जाएगा, तथा अगले श्लोक पर जाने के लिए अगला श्लोक(Next Shloka) नामक बटन दिखाई देगा। इस पर क्लिक करके आप अगले श्लोक पर चले जाएंगे और अगले श्लोक के शब्द आपके सामने उसी प्रकार प्रकट हो जाएंगे। इस तरह आप कुल 40 चौपाये पूरे कर सकते हैं। अंत में 

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप”

 

यह संदेश दिखाई देगा और आपको हनुमान चालीसा पूरी करने के लिए बधाई संदेश प्राप्त होगा। साथ ही, पूरी हनुमान चालीसा को एक ही स्थान पर पढ़ने के लिए एक बटन भी आएगा। इस पर क्लिक करके आप पूरी चालीसा एक ही स्थान पर पढ़ सकते हैं।

तुम्ही क्विझ सुरू केल्यावर, पहिला स्क्रीन तुम्हाला येईल- Hanuman Chalisa Quiz- Introduction या नांवाने. त्यात पहिल्यांदा फिक्या अक्षरांत सुरुवातीच्या दोह्याचे शब्द येतील.  random म्हणजेच कुठलाही क्रम नसलेले, येतील. उदाहरणार्थ-

श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि ।

बरनऊ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि

यातील सर्व शब्द वर दिलेले आहेत. तुम्हाला ते शब्द योग्य क्रमाने तुमच्या बोटाने ओढून त्यांच्या योग्य जागी बसवायचे आहेत. शब्दाची जागा योग्य असेल तर तो तिथे फिट बसेल, अन्यथा बसणार नाही. वरील  श्लोकाचे सगळे शब्द योग्य जागी बसले, की तुम्हाला अभिनंदनपर मेसेज येईल, पूर्ण श्लोक पुन्हा लिहून येईल, आणि पुढील श्लोकाला जाण्यासाठी Next Shloka असे एक बटन येईल. त्याच्यावर क्लिक करून तुम्ही पुढील श्लोकावर गेले, की  पुन्हा पुढील श्लोकाचे शब्द त्याच प्रकारे तुमच्यासमोर येतील. अशा प्रकारे तुम्ही एकूण ४० चौपाया  पूर्ण करू शकता. शेवटी “

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप

हा मेसेज येईल आणि तुम्ही हनुमान चालीसा पूर्ण केल्याबद्दल अभिनंदनपर मेसेज येईल. तसेच पूर्ण हनुमान चालीसा  एका ठिकाणी वाचण्यासाठी एक बटन येईल. त्यावर क्लिक करून तुम्ही पूर्ण चालीसा एके ठिकाणी वाचू शकता.  

When you start the quiz, the first screen will appear to you – Hanuman Chalisa Quiz- Introduction. In it, the words of the first couplet will appear in faded letters. Random, that is, in no order. For example –

Shriguru Charan Saroj Raj Nij Manu Mukur Sudhari.

Baranau Raghuvar Vimala Jasu Jo Dayaku Phala Chari

All the words in this are given above. You have to drag the words in the correct order with your finger and place them in their correct places. If the place of the word is correct, it will fit there, otherwise it will not fit. If all the words of the above verse are placed in the correct place, you will get a congratulatory message, the entire verse will be rewritten, and a button called Next Shloka will appear to go to the next verse. By clicking on it, you will go to the next verse, or again the words of the next verse will appear in front of you in the same way. In this way, you can complete a total of 40 verses. Finally, “

Pavan Tanay Sankat Haran, Mangal Murti Roop.

Ram Lakhan Sita Sahit, Hridaya Basahu Sur Bhup”

This message will appear and a congratulatory message will appear for completing Hanuman Chalisa. Also, a button will appear to read the complete Hanuman Chalisa in one place. By clicking on it, you can read the complete Chalisa in one place.

Hanuman Chalisa Quiz

Hanuman Chalisa Quiz

हनुमान चालीसा

 

 श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुर सुधारि ।

बरनऊ रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन कुमार ।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।।

 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

महावीर विक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुँचित केसा ॥४॥

हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजे ।

काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन ।

तेज प्रताप महा जग वंदन ॥६॥

विद्यावान गुणी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मनबसिया ॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥९॥

भीम रूप धरि असुर संहारे ।

रामचंद्र के काज सवाँरे ॥१०॥

लाऐ संजीवन लखन जियाए ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाए ॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥१६॥

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।

लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥१७॥

जुग सहस्त्र योजन पर भानू ।

लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही ।

जलधि लाँघि गए अचरज नाही ॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डरना ॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनहूं लोक हाँक ते काँपै ॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहि आवै ।

महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥२५॥

संकट तें हनुमान छुडावै ।

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

सब पर राम राय सिर ताजा ।

तिनके काज सकल तुम साजा ॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोइ अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा हो रघुपति के दासा ॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई ।

हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

जै जै जै हनुमान गोसाई ।

कृपा करहु गुरु देव की नाई ॥३७॥

जो शत बार पाठ कर जोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥३८॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥४०॥

 

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥॥

 

Gita chapter 15 quiz

geeta 15

Click the Title “Gita chapter 15 quiz” above- if you can’t see the  Quiz

क्विझ खाली आहे   ⇓

स्वार्थ आणि परमार्थ- मनोरंजना बरोबर परमार्थ- श्रीमद्भगवद्गीतेचा १५ वा अध्याय खूप महत्त्वाचा आहे आणि खूप लोकांना पाठ आहे. आपल्याला तो पाठ नसेल, आणि पाठ करायचा असेल तर- खालील कोडे सोडवत रहा- थोडेच दिवसात पूर्ण अध्याय सहज पाठ होईल. तो पर्यन्त खालील दिलेला अध्याय वाचून, त्याप्रमाणे सोडवला तरी चालेल. आपणही सोडवा- इतरांनाही द्या!

अध्याय १५ – पुरुषोत्तम योग

श्रीभगवानुवाच|

ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥ १५-१॥

अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः
अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके ॥ १५-२॥

न रूपमस्येह तथोपलभ्यते नान्तो न चादिर्न च सम्प्रतिष्ठा
अश्वत्थमेनं सुविरूढमूलं असङ्गशस्त्रेण दृढेन छित्त्वा ॥ १५-३॥

ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गता न निवर्तन्ति भूयः
तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी ॥ १५-४॥

निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञै- र्गच्छन्त्यमूढाः पदमव्ययं तत् ॥ १५-५॥

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ १५-६॥

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः
मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥ १५-७॥

शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥ १५-८॥

श्रोत्रं चक्षुः स्पर्शनं च रसनं घ्राणमेव च
अधिष्ठाय मनश्चायं विषयानुपसेवते ॥ १५-९॥

उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा गुणान्वितम्
विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः ॥ १५-१०॥

यतन्तो योगिनश्चैनं पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम्
यतन्तोऽप्यकृतात्मानो नैनं पश्यन्त्यचेतसः ॥ १५-११॥

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्
यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम् ॥ १५-१२॥

गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा
पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः ॥ १५-१३॥

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः
प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् ॥ १५-१४॥

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनञ्च
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ॥ १५-१५॥

द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च
क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते ॥ १५-१६॥

उत्तमः पुरुषस्त्वन्यः परमात्मेत्युदाहृतः
यो लोकत्रयमाविश्य बिभर्त्यव्यय ईश्वरः ॥ १५-१७॥

यस्मात्क्षरमतीतोऽहमक्षरादपि चोत्तमः
अतोऽस्मि लोके वेदे च प्रथितः पुरुषोत्तमः ॥ १५-१८॥

यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम्
स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥ १५-१९॥

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ
एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥ १५-२०॥

ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु
ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुन संवादे
पुरुषोत्तमयोगो नाम पञ्चदशोऽध्यायः ॥ १५॥

खालील शब्द आपल्या बोटाने ओढून त्यांच्या योग्य जागी बसवा. एक श्लोक झाल्यावर पुढील श्लोक येईल. पूर्ण २० श्लोक झाल्यावर पूर्ण अध्याय येईल. 

संकल्पना आणि निर्मिती- माधव भोपे 
Bhagavad Gita Chapter 15 Quiz

Bhagavad Gita Chapter 15 Quiz

Sunita Williams return to earth- Watch Live

sunita williams-1

Sunita Williams to return to earth tomorrow morning at 3.27 a.m.I.S.T

sunita-3

 

 

 

Sunita Williams return to earth- Watch Live

Astronauts Sunita Williams and Butch Wilmore, who were stuck at the International Space Station (ISS) for more than nine months, began their return journey on Tuesday morning. According to NASA, Williams and Wilmore undocked from the ISS at 10:35 am IST and set on a 17-hour trip back to Earth.sunita-4

The spacecraft, Elon Musk-led SpaceX’s Dragon, will splash down off the coast of the American state of Florida around 3:27 am IST Wednesday.

The two astronauts flew to the orbital lab in June last year, on what was supposed to be a days-long roundtrip to test Boeing’s Starliner on its first crewed flight. The spaceship, however, developed propulsion problems and was deemed unfit to fly them back and instead returned empty.

Watch her return to earth LIVE by clicking on the link below.

Sunita Williams Return Live: Sunita Williams, Butch Wilmore will be carried on stretchers after reaching Earth

Nasa astronauts Sunita Williams, Butch Wilmore, Nick Hague are expected to reach earth on March 19; the splashdown is expected at 3.27am as per Indian Standard Time. Fans and followers of the astronauts who have been praying for their safe return are worried about their health, especially how they will adjust to the earth’s gravitational force.

One of the biggest challenges astronauts face is the inability to walk on earth. Many astronauts struggle to stand or move normally, often requiring assistance. This phenomenon is primarily due to the effects of microgravity on the human body. As soon as they reach Earth, they are carried on stretchers.

“A lot of them don’t want to be brought out on a stretcher, but they’re told they have to be,” John DeWitt, director of applied sports science at Rice University in Texas and a former senior scientist at Nasa’s Johnson Space Center told Live Science. He has developed methods to improve astronaut health during spaceflight.

Primarily for this reason, astronauts are typically rolled out on a stretcher after their landing as a precautionary measure, DeWitt said.

Another factor that explains why astronauts find it difficult to walk, is fluid redistribution. In space, blood and fluids shift toward the upper body. Upon returning to Earth, astronauts may experience dizziness or fainting due to a sudden drop in blood pressure when standing up. This is because the body needs time to recondition its ability to regulate blood flow under Earth’s gravity.

A glimpse of Vedic knowledge-3

yagya

A glimpse of Vedic knowledge-3

A glimpse of Vedas या लेखमालेत आपण वेदांबद्दल काही माहिती जाणून घेण्याचा प्रयत्न करीत आहोत. आपल्या या अत्यंत समृद्ध आणि कालातीत ठेव्याविषयी पाश्चात्य लोक किती आस्थापूर्वक अभ्यास करतात हे पाहिल्यावर आपल्याला या गोष्टींची अगदी प्राथमिक माहिती तरी असली पाहिजे असा विचार आला.

पहिल्या लेखात आपण प्रस्थान त्रयी कशाला म्हणतात, श्रुति प्रस्थान, स्मृति प्रस्थान आणि न्याय प्रस्थान म्हणजे काय याची थोडक्यात माहिती घेतली.

सनातन संस्कृतीचे आधारभूत असलेले वाङमय म्हणजे वेद होत. ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद आणि अथर्ववेद हे ते चार वेद होत. संस्कृत मधील विद् या संज्ञेपासून वेद हा शब्द बनला आहे. विद् म्हणजे ‘जो जाणतो’ आणि वेद म्हणजे ‘जाणणे’.

चार वेदांत सगळ्यात मुख्य आणि सगळ्यात मोठा ऋग्वेद आहे. मोठा म्हणजे किती मोठा? तर ऋग्वेदात साधारण १०४६२ मंत्र, किंवा ऋचा आहेत. ज्या रचना पद्यस्वरूपात किंवा छंदोबद्ध आहेत त्यांना ऋचा म्हटले जाते. ऋक् + वेद म्हणजे ऋग्वेद. यातील ऋक् म्हणजे प्रार्थनापर किंवा स्तुतिपर मंत्र.  यजुस् म्हणजे यज्ञात वापरले जाणारे गद्य मंत्र. यजुर्वेद मुख्यतः यज्ञात वापरल्या जाणाऱ्या गद्य मंत्रांचा संग्रह आहे असे म्हटले तरी चालेल. यजुर्वेदात १९७५ मंत्र आहेत. सामवेदातही  जवळपास तितकेच मंत्र आहेत. पण सामवेदात बहुतेक मंत्र ऋग्वेदातीलच जसेच्या तसे घेतले आहेत. सामवेदात ते मुख्यतः गेय (गायल्या जाणाऱ्या) स्वरूपात आले आहेत. आणि अथर्ववेदात जवळ जवळ ६००० मंत्र आहेत. अथर्ववेदात अनेक तांत्रिक बाबतीतले, तसेच तथाकथित ‘वाम’ मार्गातील मंत्र आहेत. याबद्दल आपण पुढे माहिती घेऊ. याला आपल्या सोयीसाठी पुढील टेबलमध्ये मांडता येईल.

क्र.

वेद

मंत्र संख्या

शैली

विवरण

1

ऋग्वेद

10462

मन्त्रपरक

सगळ्यात  प्राचीन वेद

2

यजुर्वेद

1975

गद्यात्मक

कर्मकांडपरक, शुक्ल आणि  कृष्ण भागात विभाजित

3

सामवेद

1875

गेयात्मक

संगीतमय, यातील बहुतेक  मंत्र ऋग्वेदातीलच आहेत.

4

अथर्ववेद

5987

प्रौद्योगिकी, आरोग्य आणि तंत्रपरक

सगळ्यात नवीन वेद

ऋग्वेदात काय आहे?

ऋग्वेदात निसर्गाची, निसर्गातील विविध घटकांची आणि त्यांच्या देवतांची स्तुति आणि अत्यंत काव्यमय वर्णनें आहेत. अग्नि, वायू, इन्द्र, वरुण, विश्वदेव, मरुत, प्रजापति, सूर्य, उषा, पूषा, रुद्र, सविता या देवतांची सूक्तें आहेत. सूक्त म्हणजे स्तुति करणारी, ‘सु’ उक्ति. ऋग्वेदातील पहिलाच मंत्र किंवा ऋचा खालीलप्रमाणे आहे:

ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम् ॥ १.१.१

पदच्छेद- ओ३म्  अ॒ग्निम् । ई॒ळे॒ । पु॒रःऽहि॑तम् । य॒ज्ञस्य॑ । दे॒वम् । ऋ॒त्विज॑म् । होता॑रम् । र॒त्न॒ऽधात॑मम् ॥ १.१.१

agni

ई॒ळे॒ म्हणजे स्तुति करणे. अग्नीचे मनुष्याच्या जीवनात अत्यंत महत्त्वाचे स्थान आहे. ऋग्वेदाच्या पहिल्याच ऋचेमध्ये अशा अग्नीची स्तुति आणि प्रार्थना केली आहे. यात पुरोहित म्हणजे यज्ञाचे नेतृत्व करणारा पुजारी, ऋत्विज यांचे चार प्रकार असतात- होतार , अध्वर्यु, उद्गाता, आणि  ब्रह्मा.  ऋत्विज म्हणजे योग्य वेळी आहुति देणारा.  ‘होतार’ म्हणजे देवतांचे आवाहन  करणारा, या सर्व शब्दांचे अर्थ आपण पुढील काही भागांत पाहणार आहोत. जी खूप रंजक माहिती आहे. मी सुरुवातीच्या लेखात उल्लेख केलेल्या रशियन विद्वानाच्या व्हिडिओमध्ये त्यांनीं याबाबत सविस्तर माहिती सांगितली आहे.!

yagya

सर्व वेद हे साधारण चार भागांमध्ये विभागलेले असतात- १. संहिता, २. ब्राह्मण, ३. आरण्यक आणि ४. उपनिषद.

पूर्वी मनुष्याच्या जीवनाचे चार आश्रम किंवा अवस्था मानल्या जात- ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम आणि संन्यासाश्रम.

विद्यार्थी जेंव्हा गुरुकुलात वेद शिकायला जाई, तेंव्हा वेदातील चारही भाग तो शिके, पण त्यातील संहिता भाग जास्त करून त्याला ब्रह्मचर्याश्रमात उपयोगी येई, ब्राह्मण भाग गृहस्थाश्रमात, आरण्यक भाग वानप्रस्थाश्रमात आणि उपनिषद संन्यासाश्रमात.    

1) संहिता –

संहिता म्हणजे संग्रह. वेळोवेळी ऋषींनी रचलेले गद्य व पद्य मंत्र विषयवारीने एकत्र केले, त्याच संहिता होत. ऋग्वेद हा पद्यमंत्रांचा संग्रह आहे. हे पद्यमंत्र म्हणजे निरनिराळ्या देवतांच्या मुख्यत: प्रार्थना किंवा स्तोत्रे होत. हा भाग मुख्यतः ब्रह्मचर्याश्रमात उपयोगी येई

२.)‘ब्राह्मण’ या भागात विविध यज्ञ कसे करावयाचे, ह्याचे तपशीलवार विवरण दिलेले आहे. गृहस्थाश्रमात करणे अपेक्षित असलेल्या यज्ञातील प्रधान कर्म, अंगभूत कर्मे, कर्माची साधने, विविध नामे, यज्ञांचे अधिकारी व यज्ञांची विविध फले ह्यांत सांगितलेली असतात. यज्ञकर्मे रीतसर पार पाडण्याचा महिमा सूचित करणाऱ्या देव, ऋषी, असुर इत्यादिकांच्या कथा, योग्य पद्धतीने पार पाडलेल्या कर्माची व साधनांची वर्णने, तसेच अयोग्य रीतीने अनुष्ठिलेल्या कर्मांच्या व निषिद्ध पदार्थांच्या दुष्परिणामांची वर्णने, ह्यांत आलेली असतात.

3) आरण्यके –

अरण्यातच ज्या भागाचे व्रतस्थ राहून पठन करावयाचे तो भाग म्हणजे ‘आरण्यक’ होय. सर्व आरण्यके म्हणजे ब्राह्मणग्रंथांची अखेरची प्रकरणे होत. यांत यज्ञधर्माच्या विधानात्मक विवेचनापेक्षा यज्ञाचे तात्त्विक विवेचन आढळते. मनुष्याने गृहस्थाश्रम संपवून, वानप्रस्थाश्रमात प्रवेश केल्यानंतर या भागांचा अर्थ त्याला अधिक चांगल्या प्रकारे समजू शकत असावा.

4) उपनिषदे –

सामान्यतः जीव, ब्रह्म आणि जगत्‌ यांचे संबंधात विवेचन करणारे तत्त्वज्ञानात्मक भाग  उपनिषदे म्हणून ओळखली जातात. संन्यासाश्रमात हा भाग समजण्याएवढी प्रगल्भता मनुष्याला आलेली असे. पण म्हणून अर्थात उपनिषद इतर कुठल्या आश्रमात वाचू नये असे मुळीच नाही.

उपनिषदें ही साधारणतः वेदाच्या अंतिम भागात येतात म्हणून त्यांना ‘वेदान्त’ म्हटले जाते. किंवा वेदांचा ‘निचोड’ म्हणता येईल, असा हा भाग असतो. गंमत म्हणजे, ज्या यज्ञ, याग यांविषयी आधीच्या भागात सविस्तर माहिती दिलेली असते, त्यांच्याही पलिकडे ‘परब्रह्म’ कसे आहे, याचे या भागांत वर्णन केलेले असते.

अनेक प्राचीन उपनिषदे ही वर्तमान आरण्यकांचे भाग असावेत. तसेच आज प्रसिद्ध असलेली प्राचीन उपनिषदे ज्या आरण्यकांचे भाग आहेत, त्यांतील उपनिषदांव्यतिरिक्त भागांनाही, ‘उपनिषद’ ही संज्ञा आरण्यकांमध्ये दिलेली असते. उदा., ‘बृहदारण्यक’ (मोठे आरण्यक) हा शतपथ ब्राह्मण नामक ब्राह्मणग्रंथाचा भाग असून हेच बृहदारण्यकोपनिषद म्हणून निर्दिष्ट केले जाते.

ऋग्वेदात साधारणपणे खालील वर्णन आहे.

  1. देवी-देवता : ऋग्वेदात इंद्र, अग्नि , सूर्य, विष्णू, सोम आदी प्रमुख देवतांसह ३३ देवी-देवतांची स्तुती व वर्णन आहे. या देवता विविध नैसर्गिक शक्ती आणि घटनांशी संबंधित आहेत.
  2. निसर्ग : सूर्य, चंद्र, नद्या, पर्वत, वृक्ष, वनस्पति  अशा निसर्गाच्या विविध पैलूंचे वर्णन यात केले आहे. या नैसर्गिक घटकांची देवता म्हणून पूजा केली जात असे.
  3. समाजजीवन : विविध वर्ग, व्यवसाय, चालीरीती व परंपरा यांचे वर्णन करून समकालीन समाजाची झलक यात दिसते.
  4. तत्त्वज्ञान आणि नीति : जीवन, मृत्यू, आत्मा, देवत्व, सत्य, न्याय आणि कर्म या विषयांवर सखोल विचार.
  5. स्तुति आणि प्रार्थना : ऋग्वेदात समृद्धि,  आरोग्य, विजय आणि मोक्षाच्या इच्छांसह देवी-देवतांची विविध स्तुति आणि प्रार्थना आहेत.
  6. पौराणिक कथा : यात अनेक पौराणिक कथा आणि दैवी पात्रे देखील आहेत, जी देवी-देवता आणि नैसर्गिक शक्तींचे सामर्थ्य वर्णन करतात.

प्रसिद्ध ‘गायत्री मंत्र’, तसेंच ‘पुरुष सूक्त’ हे ऋग्वेदाचा भाग आहेत. हे आपणाला माहिती असावे.

पुढील भागात आपण काही अत्यंत रंजक माहिती पाहणार आहोत. नक्की वाचा.

माधव भोपे 

यापूर्वीचे लेख इथे वाचा 

A glimpse of Vedic knowledge-1

A glimpse of Vedic knowledge-2

Trending song Gulabi sadi by two little girls

gulabi sadi dance

Trending song Gulabi Sadi

gulabi sadi dance

This trending Marathi song is choreographed by my grand daughter Saumya and performed by her with her little sister. Saumya has entirely independently choreographed this song. 

Subscribe to Saumyas corner, you tube iconyou tube channel to watch interesting videos